5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए ज्ञान, संस्कार और संस्कृति पर आधारित प्रतियोगिता — जिसमें विजेता बच्चों को मिलेगा उज्जैन और नलखेड़ा की निःशुल्क पुण्य-तीर्थ यात्रा का अवसर।
राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के मार्गदर्शन में
सबसे महत्वपूर्ण नियम: हर बच्चे की भागीदारी के लिए उसके माता और पिता — दोनों का सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र अनिवार्य है (किसी एक के स्थान पर विधिक संरक्षक का पहचान-पत्र मान्य है)। यह पहचान-पत्र बच्चे का नहीं, माता-पिता/संरक्षक का होना चाहिए। पहले सनातन सांस्कृतिक संघ से जुड़ें, फिर बच्चे को स्पर्धा से जोड़ें।
पहचान-पत्र बनवाएँसनातन संस्कार स्पर्धा — एक पहल, जो बच्चों को संस्कार और संस्कृति से जोड़ रही है।
सनातन सांस्कृतिक संघ की सनातन संस्कार स्पर्धा — राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के मार्गदर्शन में।
सनातन संस्कार स्पर्धा, 5 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आयोजित एक ज्ञान एवं संस्कार आधारित प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य बच्चों को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से रोचक तथा प्रतियोगिता के माध्यम से परिचित कराना है।
यह स्पर्धा सनातन सांस्कृतिक संघ द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। संघ विभिन्न मोक्षलक्षी भारतीय परंपराओं के बीच सांस्कृतिक एकता और भारतीय जीवन-मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करता है। इसमें चार प्रमुख परंपराएँ सम्मिलित हैं:
प्रथम चरण में यह स्पर्धा तीन जिलों — ललितपुर, झाँसी और टीकमगढ़ — में प्रारंभिक अभियान के रूप में आयोजित की जा रही है।
भागीदारी के लिए तीन बातें आवश्यक हैं — बच्चे की आयु, जिला और माता-पिता (या संरक्षक) की सनातन सांस्कृतिक संघ सदस्यता।
स्पर्धा में 5 से 12 वर्ष की आयु के बालक-बालिकाएँ भाग ले सकते हैं।
प्रथम चरण में ललितपुर, झाँसी और टीकमगढ़ जिलों के बच्चों के लिए स्पर्धा आयोजित है।
प्रत्येक बच्चे के माता और पिता — दोनों का सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र अनिवार्य है (किसी एक के स्थान पर विधिक संरक्षक मान्य)।
ध्यान रहे: सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र बच्चे का नहीं, बल्कि उसके माता और पिता (अथवा विधिक संरक्षक) का होना अनिवार्य है — दोनों पहचान-पत्र सत्यापित किए जाते हैं। वैध पहचान-पत्रों के बिना बच्चे का पंजीकरण पूर्ण नहीं माना जाएगा। सदस्यता निःशुल्क है — यहाँ से बनवाएँ।
पंजीकरण के साथ प्रत्येक प्रतिभागी बच्चे को "सनातन संस्कार सूची" नामक पुस्तक/पुस्तिका निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। यह बच्चों के लिए भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को सरल एवं रोचक ढंग से समझने की अध्ययन सामग्री होगी।
बच्चा इसी सामग्री से स्पर्धा की तैयारी करेगा। इस प्रकार परिवार भी बच्चे के साथ बैठकर संस्कारों की चर्चा कर सकेंगे।
प्रत्येक जिले से 5 बालिकाएँ और 5 बालक — इस प्रकार तीनों जिलों से कुल 30 विजेता बच्चों का चयन किया जाएगा।
यात्रा का प्रारंभ
श्री महाकालेश्वर दर्शन
माँ बगलामुखी दर्शन एवं हवन
वापसी का पड़ाव
यात्रा का समापन
यह यात्रा बच्चों के लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को निकट से अनुभव करने का अवसर भी होगी।
पहचान-पत्र से लेकर तीर्थ यात्रा तक — आठ चरणों में पूरी प्रक्रिया।
बच्चे के माता और पिता — दोनों का सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र होना अनिवार्य है (किसी एक के स्थान पर विधिक संरक्षक मान्य)। नहीं है तो यहाँ निःशुल्क बनवाएँ।
नीचे दिए गए पंजीकरण प्रपत्र में बच्चे का नाम, आयु, जिला और माता-पिता/संरक्षक की जानकारी भरकर सनातन संस्कार स्पर्धा में पंजीकरण करें।
पंजीकरण के साथ बच्चे को निःशुल्क अध्ययन सामग्री "सनातन संस्कार सूची" उपलब्ध कराई जाएगी।
बच्चा निर्धारित अध्ययन सामग्री के माध्यम से स्पर्धा की तैयारी करता है।
बच्चा सनातन संस्कार स्पर्धा में भाग लेता है। तिथि एवं प्रारूप की जानकारी संघ द्वारा पंजीकृत अभिभावकों को दी जाएगी।
जिलेवार परिणाम घोषित किए जाएँगे और विजेताओं का चयन पारदर्शी ढंग से होगा।
प्रत्येक जिले से 5 बालिकाएँ और 5 बालक — कुल 10 विजेता चुने जाएँगे।
चयनित विजेताओं को निःशुल्क पुण्य-तीर्थ यात्रा — झाँसी से उज्जैन (श्री महाकालेश्वर) और नलखेड़ा (माँ बगलामुखी) तक।
राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती हरिप्रिया भार्गव जी के मार्गदर्शन में संस्कार, संस्कृति और सेवा को समर्पित संगठन।
सनातन सांस्कृतिक संघ वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख — इन चार मोक्षलक्षी भारतीय परंपराओं के बीच सांस्कृतिक एकता स्थापित करने तथा भारतीय जीवन-मूल्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कार्य करता है। संघ का लक्ष्य श्रद्धा, शांति और शौर्य के मूल्यों के साथ समाज और राष्ट्र को उन्नति के मार्ग पर ले जाना है।
संघ का विश्वास है कि जब गाँव सशक्त होंगे, तभी देश सशक्त होगा। इसी सोच के साथ संघ बच्चों, युवाओं और परिवारों को संस्कारों से जोड़ने का कार्य करता है, और सनातन संस्कार स्पर्धा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बच्चों को अध्ययन सामग्री और प्रतियोगिताओं के माध्यम से जीवन-मूल्यों से जोड़ना।
वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख परंपराओं को एक सूत्र में पिरोना।
गाँव-गाँव तक पहुँचकर परिवारों को संघ की निःशुल्क सदस्यता से जोड़ना।
पंजीकरण करने से पहले कृपया सभी नियम ध्यानपूर्वक पढ़ लें।
चिंता न करें। सनातन सांस्कृतिक संघ की सदस्यता पूरी तरह निःशुल्क है। माता, पिता अथवा विधिक संरक्षक सदस्यता लेकर पहचान-पत्र प्राप्त करें, फिर बच्चे का पंजीकरण करें।
निःशुल्क सदस्यता लेंसनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र, जो सनातन संस्कार स्पर्धा में बच्चे के पंजीकरण के लिए अनिवार्य है।
संघ की गतिविधियों, कार्यक्रमों और अभियानों की जानकारी।
संस्कार एवं सेवा के कार्यों से जुड़ने तथा संघ परिवार का हिस्सा बनने का अवसर।
कोई शुल्क नहीं — सदस्यता पूर्णतः निःशुल्क।
सनातन संस्कार स्पर्धा में 5 से 12 वर्ष की आयु के बालक-बालिकाएँ भाग ले सकते हैं।
पहचान-पत्र बच्चे का नहीं, बल्कि उसके माता और पिता — दोनों का होना अनिवार्य है (किसी एक के स्थान पर विधिक संरक्षक मान्य है)।
संघ की वेबसाइट पर जाकर निःशुल्क सदस्यता लें और पहचान-पत्र प्राप्त करें। उसके बाद बच्चे का पंजीकरण करें। सदस्यता के लिए कोई शुल्क नहीं है।
प्रथम चरण में यह स्पर्धा ललितपुर, झाँसी और टीकमगढ़ — तीन जिलों में प्रारंभिक अभियान के रूप में आयोजित की जा रही है।
पंजीकरण के साथ प्रतिभागी बच्चे को यह अध्ययन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी जानकारी संघ द्वारा पंजीकृत संपर्क क्रमांक पर तथा व्हाट्सऐप चैनल के माध्यम से दी जाएगी।
प्रत्येक जिले से 10 विजेता (5 बालिकाएँ + 5 बालक) चुने जाएँगे, यानी तीन जिलों से कुल 30 बच्चे। इन सभी को झाँसी से उज्जैन और नलखेड़ा तक निःशुल्क पुण्य-तीर्थ यात्रा का अवसर मिलेगा।
सभी सूचनाएँ संघ के आधिकारिक व्हाट्सऐप चैनल तथा पंजीकृत संपर्क क्रमांक पर दी जाएँगी। कृपया चैनल से अवश्य जुड़ें।
कृपया सही जानकारी भरें। पंजीकरण से पहले माता और पिता (अथवा संरक्षक) का सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र होना आवश्यक है।
सनातन सांस्कृतिक संघ पहचान-पत्र नहीं है? पहले यहाँ निःशुल्क बनवाएँ, फिर बच्चे का पंजीकरण करें। पंजीकरण जमा करते ही आपको धन्यवाद पृष्ठ पर भेजा जाएगा।